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حقایق قرآن
 
क़ुरआन की ख़ुसूसियत कलामे हक़: कलामे इलाही, क़ुरआन तुम्हारे दरमियान ऐसा बोलने वाला है जिस की ज़बान हक़ कहने से थकती नही है, और हमेशा हक़ कहती है, और ऐसा घर है कि जिस के अरकान मुनहदिम नही होते हैं, और ऐसा साहिबे इज़्ज़त है कि जिस के साथी कभी शिकस्त नही खा सकते हैं। आयत के संदेश: नबी मासूम (पाप से पाक) होते हैं।और अल्लाह के आदेश के ख़िलाफ़ कोई काम नही करते है। और न ही उसकी वहयी (आयत के संदेश) में कोई फेर बदल करते है। अल्लाह के दूसरे बंदो की तरह हज़रते ईसा ख़ुद भी अल्लाह को अपना पालने वाला कह रहे है। (رَبِّي وَرَبَّكُمْ) नबी लोगों के कामों की देखरेख करते हैं। (وَكُنتُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا) إِن تُعَذِّبْهُمْ فَإِنَّهُمْ عِبَادُكَ وَإِن تَغْفِرْ لَهُمْ فَإِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ 118
 
 
 
 
 
محمد رسول الله
 
पैग़म्बरे इस्लाम की निष्ठावान पत्नी हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाहे अलैहा पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की पैग़म्बरी की सार्वजनिक घोषणा के दस वर्ष बाद पैग़म्बरे इस्लाम स की पत्ती हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाहे अलैहा ने संसार से विदा ली। यह दिन पैग़म्बरे इस्लाम स और हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाहे अलैहा के संयुक्त जीवन का अंतिम बिंदु था। शहादते इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम जो कोई भी इस्लाम के इतिहास का न्याय के साथ अध्ययन करे तो उसे पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व
 
 
 
 
 
سیرت معصومین(ع)
 
उदार- बच्चे" बच्चे सभी को प्यारे लगते हैं परन्तु यदि वे उदार भी हों तो और अधिक अच्छे लगने लगते हैं। क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप अपने बच्चे की कन्जूसी पर चिन्तित हुए हों? और आप ने यह सोचा हो कि इसे किस प्रकार उदार बनाया जा सकता है? विशेषकर कि जब आप स्वंय उदारवादी हों इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की शहादत आज इस्लामी जगत, पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के एक परिजन के शोक में डूबा हुआ है। मुसलमान उस महान व दयालु इमाम को श्रृद्धा सुमन अर्पित करते हैं जिन्होंने अपनी अटठाइस आयु में, इस्लामी इतिहास में अनगिनत सुनहरे पृष्ठ जोड़ दिए। आज ही के दिन वर्ष २६० हिजरी क़मरी बराबर ८७३ ईसकी में इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम तत्कालीन अब्बासी शासक के पड़यंत्र से शहीद हो गए।
 
 
 
 
 
نقد اديان و مذاهب
 
पश्चिम में नैतिक पवित्रता के लक्षण १ मनुष्य प्राकृतिक रूप से सच्चाई और पवित्रता से प्रेम करता है। अनुभवों से पता चला है कि मनुष्य विशेष रूप से महिलाओं में नैतिक मूल्यों से जितना प्रेम होता है वह उनती ही अधिक सुरक्षित होती हैं। जिन लोगों को पवित्र शिष्टाचार का अनुभव है वह इसे मानव जीवन का आवश्यक भाग मानते हैं। इस समय पश्चिम की नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों के पालन निरंकुशता से दूरी का रुजहान देखने में आ रहा है। इस कार्यक्रम में हम एसे ही कुछ उदाहरणों की ओर संकेत करेंगे। पश्चिम में नैतिक पवित्रता के लक्षण २ कार्यक्रम पश्चिम में नैतिक पवित्रता के लक्षण की एक अन्य कड़ी के साथ आपकी सेवा में उपस्थित हैं। पिछले कार्यक्रम में हमने बताया था कि पश्चिमी समाजों में जीवन शैली के बारे में नए विचार उभर कर सामने आ रहे हैं। युवाओं को निरंकुश छूट पर आपत्ति है और वह चाहते हैं कि आध्यात्म पर अधिक ध्यान दिया जाए। इस कार्यक्रम में हम पश्चिम में नैतिक पवित्रता के लक्षणों पर अपनी चर्चा को आगे बढ़ाएंगे।
 
 
 
 
 
امام مهدی (عج)
 
ज़हूर का ज़माना पहला हिस्सा ज़हूर से पहले दुनिया की हालत प्रियः पाठकों ! हम ने पिछले अध्यायों में इमामे ज़माना (अज्जल अल्लाहु तआला फरजहू शरीफ़) की ग़ैबत और उसके कारणों का उल्लेख किया है। हम ने बताया कि अल्लाह की वह आख़िरी हुज्जत ग़ायब हो गये हैं और जब उनके ज़हूर का रास्ता हमवार हो जायेगा तो वह ज़ाहिर हो कर दुनिया को अपनी हिदायत व मार्गदर्शन से लाभान्वित करेंगे। ग़ैबत के ज़माने में लोग ऐसे काम कर सकते हैं जिनसे इमाम (अ. स.) के ज़हूर का रास्ता जल्दी से जल्दी हमवार हो जाये। लेकिन वह, शैतान, इच्छाओं के अनुसरण, कुरआन की सही तरबियत से दूरी और मासूम इमामों (अ. स.) की विलायत और इमामत को क़बूल न करने की वजह से ग़लत रास्ते पर चल पड़े है। आज इस दुनिया में हर दिन नये ज़ुल्म व अत्याचार की बुनियादें रखी जाती हैं। पूरी दुनिया में ज़ुल्म व सितम बढ़ता जा रहा है और इंसानियत इस रास्ते के चुनाव से एक बहुत भयंकर नतीजे की तरफ़ बढ़ रही है। आज दुनिया की हालत यह है कि चारों तरफ़ ज़ुल्म व अत्याचार फैला हुआ है, बुराईयों का बोल बाला है, अखलाक़ी व सदाचारिक मर्यादाओं का अंत हो चुका है, शाँति व सुरक्षा का दूर दूर तक भी कहीँ पता नहीं है, ज़िन्दगी आध्यात्म व पवित्रता से खाली है, समाज में मातहत लोगों के हक़ों को पैरों तले रौंदा जा रहा है, यह सब चीज़ें ग़ैबत के ज़माने में इंसान का नाम ए आमाल है। यह एक ऐसी हक़ीक़त है जिस के बारे में मासूमीन (अ. स.) ने शताब्दियों पहले भविषय वाणी कर के इसकी काली तस्वीर पेश कर दी थी। तीसरा हिस्सा ज़हूर जिस वक़्त ज़हूर की बातें होती हैं तो इंसान के दिल में एक बहुत सुन्दर एहसास पैदा होता है जैसे वह नहर के किनारे किसी हरे भरे बाग में बैठा हुआ है और मधुर स्वर बुलबुलों की आवाज़ सुन रहा है। जी हाँ ! अच्छाइयों का प्रकट होना और अच्छाइयों का फैलना, थकी हारी रुहों व आत्माओं को ख़ुशिया प्रदान करता है, और इससे उम्मीदवारों की आँखों में बिजली सी चमक उठती है। हम इस हिस्से में हज़रत इमाम महदी (अ. स.) के ज़हूर और उनके हुज़ूर के मौक़े पर घटने वाली घटनाओं का वर्णन करेंगे। और उस बेमिसाल जमाल को ग़ैबत का पर्दा उठाते हुए देखेंगे।
 
 
 
 
 
پاسخ شبهات عليه شيعه
 
सवाल जवाब सवाल- आयते ततहीर किस सूरे में है जवाब – सूर -ए- अहज़ाब आयत न. 33 सवाल- आयते विलायत किस सूरे में है ? जवाब- सूर -ए- मायदा आयत न. 55 सवाल- ياا يها الرسول بلغ ما انزل اليك من ربك किस सूरे की आयत है?महदवियत का दावा करने वाले जिस तरह से तारीख़ में बहुत से लोगों ने पैग़म्बर होने का दावा किया है, इसी तरहकुछ लोगों इमाम महदी होने का दावा भी किया है।
 
 
 
 
 
مباحث اجتماعي اسلام
 
 
 
 
 
 
اخبار شيعه
 
१५ खुर्दाद जून १९६३ में आंतरिक तानाशाही और विदेशी साम्राज्य के विरुद्ध ईरानी जनता का रक्तरंजित आंदोलन इस देश के समकालीन इतिहास में एक मोड़ है। ईरान में १५ ख़ुर्दाद के नाम से प्रसिद्ध आंदोलन वास्तव में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देश की दो बड़ी घटनाओं का मिलाप बिन्दु है। 15 खुर्दाद के आंदोलन से १० वर्ष पूर्व क़ानूनी एवं ईरानी जनता द्वारा चुनी गई सरकार अमेरिका, ब्रिटेन और शाह के दरबार के संयुक्त विद्रोह में अगस्त १९५३ में गिर गई और शाह पुन: ईरान लौट आया जबकि वह ईरान की क्रांतिकारी जनता के भय से देश से भाग गया था। १२ फ़रवर्दीन ईरान का इस्लामी लोकतंत्र दिवस २९ वर्ष पूर्व आज ही के दिन, कि जब ईरान की इस्लामी क्रांति को सफल हुए दो महीने से कम का समय बीता था, वर्ष १९७९ में २९ और ३० मार्च को आयोजित होने वाले जनमत संग्रह के परिणामों की घोषणा कर दी गयी। ईरानी जनता ने इन दो दिनों में आयोजित होने वाले जनमत संग्रहों में इतने विस्तृत पैमाने पर और बढ चढकर भाग लिया कि ३१ मार्च वर्ष १९७९ को घोषणा की गयी कि ईरानी जनता ने अपने लिए इस्लामी व्यवस्था का चयन किया है। इससे पहले कि इस विषय की उपलब्धियों और भूमिका के बारे में बात करें, इस बिन्दु का उल्लेख आवश्यक है कि इस जनमत संग्रह की अपनी अलग विशोषता है जो विश्व की बड़ी क्रांतियों के इतिहास में अद्वितीय है।