मनुष्य प्राकृतिक रूप से सच्चाई और पवित्रता से प्रेम करता है। अनुभवों से पता चला है कि मनुष्य विशेष रूप से महिलाओं में नैतिक मूल्यों से जितना प्रेम होता है वह उनती ही अधिक सुरक्षित होती हैं। जिन लोगों को पवित्र शिष्टाचार का अनुभव है वह इसे मानव जीवन का आवश्यक भाग मानते हैं। इस समय पश्चिम की नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों के पालन निरंकुशता से दूरी का रुजहान देखने में आ रहा है। इस कार्यक्रम में हम एसे ही कुछ उदाहरणों की ओर संकेत करेंगे।
इस समय पश्चिमी समाजों की नई पीढ़ी में जीवन शैली के बारे में नया दृष्टिकोण विकसित हो रहा है। कुछ महिलाएं और युवा लड़कियां निरंकुश स्वतंत्रता की शिकायत कर रही हैं और उनकी मांग यह है कि आध्यात्म पर अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। अमरीकी लेखिका सुश्री वेन्डी शालीत लिखती हैः हम सांस्कृतिक दृष्टि से एक संवेदनशील युग में पहुंच गए हैं। इस समय पश्चिमी समाजों में परिवारों का टूटना, तलाक़, नशे की लत अशलीलता वह समस्याएं हैं जिनसे विशेष रूप से महिलाएं और लड़कियां चिंतित हैं। आज लड़कियों की इच्छा अतीत से भिन्न है। युवा पीढ़ी इस निरंकुशता से ऊब कर अब जीवन के प्राकृतिक ढर्रे पर लौटना चाहती है। सुश्र वेन्डी शालीत आगे कहत हैं कि आज की लड़कियां अपने छिट पुट विरोध से यह इच्छा व्यक्त करना चाहती हैं कि उन्हें अपने माता पिता के समान बनना पसंद नहीं है। वह अपनी जीवन शैली और पहनावा बदलना चाहती हैं। उनका प्रयास है कि संयम से काम लें और तर्कपूर्ण तथा पवित्र जीवन बिताएं और वैवाहिक जीवन आरंभ होने से पूर्व यौन संबंध न बनाएं।
२१ वर्षीय रिचल कहती हैं कि कुछ समय तक मेरे मन में पवित्रता के बारे में कुछ शंकाएं रहीं किंतु जब मैंने पवित्रता के बारे में वेन्डी शालीत की पुस्तक पढ़ी तो इस विषय में मुझे स्पष्ट दृष्टिकोण मिल गया। पुस्तक का अंतिम भाग जब मैंने पढ़ा तो भावुक होकर रोने लगी क्योंकि मुझे आभास हुआ कि सही रास्ता मिल गया है। मैं ईश्वर की आभारी हूं कि सही समय पर मुझे यह पुस्तक मिली और मैने इसका अध्ययन किया। अब तक पवित्र जीवन बिताने पर मुझे विशेष आत्मविश्वास और अपने भाग्यवान होने का आभास हो रहा है। इस समय बहुत से युवा पश्चिमी समाजों के नंगेपन और निरंकुशता से थक और ऊब चुके हैं। अमरीका के अनुसंधानिक केन्द्र ने वर्ष २००४ में एक अध्ययन के आधार पर घोषणा की कि दो तिहाई युवा जो अवैध यौन संबंध बना चुके थे उन्हें पछतावा है कि उन्होंने एसा क्यों किया और बहुत अच्छा होता यदि उन्होंने इस प्रकार संबंध न बनाया होता। अमरीकी शोधकर्ता सायर डियान ने हाई स्कूल की लड़कियों के गर्भधारण की रोकथाम की एक योजना पर काम करते समय रहस्योदघाटन किया कि वह लड़कियां जो इस आयु में यौन संबंध बना चुकी थीं कि उनका कहना था कि बहुत अच्छा होता यदि उन्होंने यौन संबंध स्थापित न किया होता और विवाह तक अपने ऊपर संयम रखा होता।
अमरीका के पेसिफ़िक अनुसंधान केन्द्र ने भी वर्ष २००५ में किए जाने वाले एक अध्ययन की रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें कहा गया कि अनुसंधानकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि युवावस्था में विवाह से पूर्व यौन संबंध, मादक पदार्थों का सेवन और शराब की लत आगे चलकर युवाओं में अवसाद उत्पन्न कर देती है। पश्चिमी मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि एसी लड़कियां असप्तालों में लाई जा रही हैं जिन्होंने अवसाद के कारण स्वयं को घायल कर लिया होता है। इन अस्पतालों में काम करने वाले मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अपने शरीर को क्षति पहुंचाने का विचार प्रायः भारी मानसिक तनाव से उत्पन्न होता है और यह तनाव लड़कियों में तब उत्पन्न होता है जब उन्हें अपनी भूल का आभास होता है। इस समय पश्चिमी समाजों में बहुत सी युवा लड़कियां निरंकुशता में पड़ जाने पर पछतावे का शिकार हैं। अमरीका के इंडियाना पुलिस राज्य की सोलह वर्षीय लारेन ने स्कूल टाप किया है। इस लड़की को नाइट पार्टी से कोई लगाव नहीं है। उसका कहना है कि मुझे इन पार्टियों पर खेद है। मेरी समझ में नहीं आता कि एक लड़की कुछ लड़कों के साथ इस पार्टी में क्यों भाग ले। मुझे अपनी आयु की लड़कियों के साथ मनोरंजन करना भला लगता है। लारेन रात की पार्टियों से दूर रहती है क्योंकि उसे पता है कि लड़कियों को इन पार्टियों में दूसरों के दबाव में कुछ भी करना पड़ सकता है। लारेन की कई सहेलियों के साथ एसा ही हुआ और उन्हें एसा काम करना पड़ा जिस पर उन्हें हमेशा के लिए पछतावा हुआ।
लारेन की एक सहेली बहकावे में आकर मादक पदार्थों और शराब की लत में पड़ गई है उसकी इज़्ज़त दांव पर लग गई है। लारेन ने यही देखकर अपनी सभी सहेलियों से कह दिया है कि वह अपनी एसी दुर्दशा देखना पसंद नहीं करतीं। उनकी इच्छा है कि समाज में उनका मान सम्मान सुरक्षित रहे। इससे पता चलता है कि पश्चिम के भारी समाजिक दबाव के बीच लारेन जैसी लड़कियां पूरे आत्मविश्वास नैतिक सिद्धांतों का पालन करते हुए हर समस्या से जूझने के लिए तैयार हैं। बहुत से लड़के लड़कियां और पूरी युवा पीढ़ी यौन निरंकुशता से ऊब चुकी है। जनवरी वर्ष २००६ में अमरीका के हेमिल्टन कालेज और ज़गबी अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र द्वारा कराए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि दसवीं कक्षा के दो तिहाई विद्यार्थियों की मनोकामना यह थी कि एसे उपाय किए जाएं कि मां बाप को अपने बच्चों की समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो सके। उनकी इच्छा है कि उनके ऊपर उनके अभिभावकों का अधिक निरीक्षण और नियंत्रण रहे। एक पंद्रह वर्षीय अमरीकी लड़के को अपनी मां से यह शिकायत है कि वह मुझे नहीं चाहती क्योंकि वह मुझसे कभी नही पूछती कि मैं कहा जा रहा हूं या मैं किस के साथ हूं जबकि मैं देर रात घर लौटता हूं मां ने मेरे लिए घर लौटने का कोई समय निर्धारित नहीं किया है।
निरंकुशता से सुरक्षित रखने का एक उचित और उपयोगी उपाय यह किया गया है कि लड़के लड़कियों के लिए इस विषय की विशेष क्लासें चलाई जा रही हैं। पश्चिमी समाजों में चलाई जाने वाली इन कलासों में लड़कियां बहुत रूचि ले रही हैं। वह इन क्लासों में अपनी समस्याएं रखती हैं और सुरक्षित व पवित्र जीवन व्यतीत करने के मार्ग के बारे में विचार करती हैं। पश्चिमी समाजों में अपने आप पर नियंत्रण और संयम रखने की सीख देने के कार्यक्रम बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इस समय बहुत से पश्चिमी युवा उन फ़िल्मों और ड्रामों का विरोध कर रहे हैं जिनमें अशलीलता होती है। ड्रामा लेखक विलियम स्ट्रास का कहना है कि अनुभवों से सिद्ध होता है कि युवाओं की ओर से सबसे अधिक मांग आ रही है कि ड्रामों से अशलील दृश्यों को निकाल दिया जाए। वह कहते हैं कि परिस्थितियां बदल रही हैं मैंने एक लड़की को कहते सुना कि अब नए विचार और आइडिया की ओर बढ़ना चाहिए।
हम एक अट्ठारह वर्षीय अमरीकी लड़की टेलरमूर के कुछ वाक्यों पर यह कार्यक्रम समाप्त कर रहे हैं जिसने संयम और नियंत्रण की शिक्षा वाली क्लासों में भाग लिया है। वह अपनी सहेलियों से कहती है अपने ऊपर संयम रखना बहुत अच्छा काम है। मैं गर्व से कहती हूं कि मैंने पवित्रता का मार्ग अपनाया है। तो आइए मूल्यों और मानदंडों पर कटिबद्ध रहें। हमें यह याद रखना चाहिए कि मनुष्य के भीतर यौन भावना परिवार की संरचना और मानवजाति के जीवन को आगे बढ़ने के लिए रखी गई है। नैतिक पवित्रता से हमारे भीतर गौरव उत्पन्न होता है और लोग हमारा सम्मान करते हैं। |