जब जाड़ा विदा लेने लगता है और हवा की ठंडक कम होकर लुभावी हो जाती है।
ठिठुरते दुबके खड़े वृक्षों पर सुहानी मुस्कान आ जाती है। सूखी झाड़ियों में खिलवाले फूल उपवन की मांग में सिंदूर भरने लगते हैं। वनस्पतियां अंगड़ाई लेकर अपने उपर जमी हुई बर्फ़ को तोड़ते हुए सिर बाहर हैं निकालती और वातावरण को निहारने लगती हैं।
ऐसी स्थिति से पता चल जाता है कि बहार आ गई है।
बसंत आता है तो अपने साथ ठंडी फुहारे लाता है और सब कुछ धुला धुला प्रतीत होता है। जहां तक नज़र जाए हरे-भरे मैदान, सुदंर प्राकृतिक दृष्य रंग बिरंगे फूल दिखाई देते हैं। यह देखकर मनुष्य का मन करता है कि उसका अपना अस्तित्व भी खिल उठे।
वह अपनी इस मनोदशा और कामना को बयान करना चाहता है तो कुरआन की यह आयतें उसकी मनोकामना को शाब्दिक रुप दे देती हैं।
या मुक़ल्लेबल................
हे हृदयों और दृष्टियों को बदलने वाले हे दिन और रात को चलाने वाले, हे वर्षों को बदलने वाले हमारी हालत को श्रेष्ठत म हालत में बदल दें।
परिवर्तन, परिपूर्णता की भूमिका है। जो व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे परिवर्तनों के लिए उत्सुक और तत्पर रहता है वह बसंत आने के समय परिवर्तनों की प्रतीक्षा करते हैं। वर्ष आंरभ होने के समय ईश्वर की ओर ध्यान केन्द्रित करना कि जो पूरी सृष्टि का रचयिता और संचालक है नए वर्ष में नया जीवन आरंभ करने का बड़ा अच्छा शगुन है।
विश्ववविद्याल्य के प्रोफेसर डॉक्टर इब्राहीम खुदायार कहते हैं कि नववर्ष के आगबन पर इस दुआ का पढ़ना मनुष्य के मन और आत्मा पर बड़ा अच्छा प्रभाव डालता है। यह दुआ धार्मिक दुआ होने के साथ ही प्राकृति में आने वाले परिवर्तन की शुभ सूचना भी देती है।
नववर्ष के आगमन पर इस दुआ का जाप करके हमारे जीवन में ईश्वरीय श्रद्धा घुल जाती है और मनुष्य परिपूर्णता व आध्यात्मिक सुंदरता की दिशा में कदम बढ़ता है और वह अपने पालनहार का सामिप्य प्राप्त करता है। यह दुआ मनुष्य और ईश्वर के मध्य संबंध का प्रतीक और इसी संबंध के अधार पर उस नए प्ररिवर्तन की प्रेरणादायक शिक्षा है जिसकी हर मनुष्य को आवश्यकता है।
एक ऐसे युग में जहां पर्यवरण के प्रदूषणों और मशीनी जीवन के तनावजनक कारकों ने मनुष्य को जकड़ रखा है खुशी और हर्ष का मूल्य कुछ ज़्यादा ही होता है। हर्ष व उल्लास प्राप्त करने के अनेक मार्ग हैं। एक मार्ग आंतरिक बदलाव का है। नववर्ष के अवसर पर प्रकृति में जो परिवर्वितन होता है और हम अपने घर, आंगन ,गली -मोहल्ले और परिसर में जो बदलाव देखते हैं वह हमारे भीतर उर्जा भर देता है। फलत:हम स्फूर्ति का आभास करते हैं। ईश्वर प्रकृति से संसार को सजा कर मनुष्य के भीतर जीवन के प्रति उत्साह भर देता है। फूलों की लहराती सुगंध, वातावरण में रस घोलते हुए बुलबुल के गीत पूरी सृष्टि को यौवन प्रदान करते हैं। इस बदले हुए वातावरण में मनुष्य स्वयं को भी बदल देने का प्रण करता है।
इस वर्ष बसंत ऋतु अन्य वर्षों से कुछ अलग है। इस बार की बहार में चार चांद लगे हुए हैं कारण यह है कि इस बार की बसंत ऋतु का आगमान सबसे श्रेष्ठ मनुष्य पैग़म्बरे इस्लाम के जन्म दिन की वर्षगांठ के अवसर पर हुआ है। पहाड़ों का स्थाईत्व और प्रकृति का आकार्षण पैग़म्बरे इस्लाम के महान व दृढ़ व्यक्तितव के पयार्य हैं। एह बसंत अरबी महीने रबीउल औवल के साथ आया है रबीअ का अर्थ भी है बसंत। पैग़म्बरे इस्लाम का व्यक्तिव भी यदि मनुष्य की दृष्टि में आ जाता है तो उसका पूरा अस्तित्व सुगंधित हो उठता है। बसंत आने पर लोगों एक दूसरे के प्रति जो घनिष्टता और प्रेम दिखाई पड़ता है उसमें पैग़म्बरे इस्लाम द्वारा गई परंपराओं से नई जान पड़ जाती है। पैग़म्बरे इस्लाम का कथन है कि तीन वस्तुओं को देखने से आंखों की ज्योति बढ़ती है हरियाली,प्रवाहित जल और आध्यात्मिक सुदंरता से दमकता मुख।
बसंत आता है तो यह तीनों चीज़ें एक साथ दिखाई पड़ती हैं और मनुष्य भाव- विभोर हो जाता है। जहां भी देखिए प्यार और स्नेह दिखाई देता है। लोगों के स्वर में मिठास भर जाती है। आंखों में विशेष चमक और अधरों में आकर्षक मुस्कान होती है। लोग एक दूसरे से मिलकर जीवन की हर कठिनाई को भुला देते हैं। उपहारों के साथ ही एक दूसरे के लिए शुभकामनाओं का आदान-प्रदान होता है। यह परंपरा पैग़म्बरे इस्लाम से मिली है जिनका कथन है कि एक दूसरे को उपहार दीजिए क्योंकि उपहार हृदयों के अंधकार को दूर कर देता है तथा शत्रुता और द्वेष को मिटा देता है।
नववर्ष के अवसर पर मनाई जाने वाली ईदे नौरोज़ पर लोगों का एक दूसरे से मिलने जाना भी पैग़म्बरे इस्लाम की शिक्षा का अनुसरण है उनका कथन है कि जो चाहता है कि उसके जीवन और रोज़ी में बरकत व वृद्धि हो तो उसे चाहिए कि अपने नातेदारों से संबंध रखे।
पैग़म्बर ईश्वर के वह दूत हैं जिन्होंने मानव समाजों को कल्याण और सौभाग्य का मार्ग दिखाया है। चूंकि मौसमों का बदलाव फ़सल काटने और अन्य अनेक आयामों से महत्वमूर्ण होता है इस लिए पैग़म्बरे इस्लाम ने मौसमों के बदलाव को ईश्वर की तत्वदर्शिता का प्रतीक बताया है। आगे चलकर बसंत ऋतु के आगमन पर उत्सव मनाया जाने लगा क्योंकि कृषि की दृष्टि से इसका बड़ा महत्व है। सूरए युनुस की आया नम्बर 5 में ईश्वर के बारे में आया है कि वह वही है जिसने सूर्य को प्रकाश और चंद्रमा को ज्योति बनाया और उनके लिए स्थान निर्धारित किए ताकि तुम वर्षों का हिसाब किताब कर सको। ईश्वर ने सत्य के साथ इसकी रचना की है। वह बुद्धि रखने वालों के लिए अपने चिन्ह स्पष्ट करता है।
जिस प्रकार बसंत सृष्टि में ईश्वर की सुव्यवस्था का एक परिणाम है उसी प्रकार यह मानवता की उच्च चोटियों की ओर अग्रसर होने के लिए मनुष्य के समक्ष एक अच्छा अवसर भी है। जब बसंत आता है और हर कली खिल उठती है तो वह मनुष्य को प्रलय का संदेश भी देती है। बसंत,संसार की रचना के रहस्य को बयान करता है। ईश्वर ने कुरआने मजीद में बार बार धरती और प्रकृति को नया जीवन प्रदान करने को मनुष्य के नए जीवन के लिए एक उदाहरण स्वरुप पेश किया है और यह समझाया है कि मनुष्य को मरने के बाद पुन:जीवित किया जाएगा। पूरी प्रकृति पर जीवन का नया निखार इस सच्चाई को प्रदर्शित करता है कि मनुष्य को मरणोपरांत नए जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए। यही कारण है कि बसंत की उपेक्षा नहीं की जा सकती। तो आइए बहार का स्वगत करते हैं और महाज्ञानी हज़रत ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की इस दुआ को दोहराते हैं कि हे पालनहार हमें ऐसे लोगों में सम्मिलित कर दे जो अपने जीवन में बुद्धिमत्ता के बसंत के फूल एकत्रित करते हैं और आध्यात्मिक उत्थान द्वारा स्वयं को परिपूर्णता के श्रेष्ठ स्थान पर पहुंचाते हैं।