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ज़हूर से पहले दुनिया की हालत प्रियः पाठकों ! हम ने पिछले अध्यायों में इमामे ज़माना (अज्जल अल्लाहु तआला फरजहू शरीफ़) की ग़ैबत और उसके कारणों का उल्लेख किया है। हम ने बताया कि अल्लाह की वह आख़िरी हुज्जत ग़ायब हो गये हैं और जब उनके ज़हूर का रास्ता हम...
 
ज़हूर जिस वक़्त ज़हूर की बातें होती हैं तो इंसान के दिल में एक बहुत सुन्दर एहसास पैदा होता है जैसे वह नहर के किनारे किसी हरे भरे बाग में बैठा हुआ है और मधुर स्वर बुलबुलों की आवाज़ सुन रहा है। जी हाँ ! अच्छाइयों का प्रकट होना और अच्छाइयों का फैलना, थ...
 
शायद कुछ लोग यह सोचें कि बहुत सी कल्चरल और आधारभूत ज़रुरतों के होते हुए हज़रत इमाम महदी (अज्जल अल्लाहु तआला फ़रजहू शरीफ़) के बारे में बहस करने की क्या ज़रुरत है ? क्या इस बारे में काफ़ी हद तक बहस नही हो चुकी है ? क्या इस बारे में किताबें और लेख नहीं ...
 
नाम व अलक़ाब हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का नाम हज़रत पैगम्बर(स.) के नाम पर है। तथा आपकी मुख्य़ उपाधियाँ महदी मऊद, इमामे अस्र, साहिबुज़्ज़मान, बक़ियातुल्लाह व क़ाइम हैं। जन्म व जन्म स्थान हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का जन्म सन् 255हिजरी क़म...
 
आप ने देखा होगा कि जो लोग अपनी हुकूमत बनाकर ताक़त को अपने हाथ में लेना चाहते हैं, वह पहले अपनी हुकूमत के उद्देश्यों का वर्णन नकरते हैं। कभी कभी तो ऐसा होता है कि वह उन उद्देश्यों तक पहुँचने के लिए अपनी योजनाओं को भी लोगों के सामने पेश कर देते हैं। ले...
 
ग़ायब इमाम के फ़ायदे इंसानी समाज, सैंकड़ों साल से अल्लाह की हुज्जत के ज़हूर के फ़ायदों से वंचित है और इस्लामी समाज उस आसमानी व मासूम इमाम के पास जाने में असमर्थ है। इस स्थिति से यह सवाल यह उठता है कि उनके ग़ायब होने और लोगों की नज़रों व पहुँच से ...
 
 47604
  •  2009-10-26
प्रियः पाठकों ! अब जबकि आप इंसानों को निजात व मुक्ति देने वाले और हज़रत आदम (अ. स.) से लेकर पैग़म्बरे इस्लाम (स.) तक सभी नबियों (स.) के मक़सद को पूरा करने वाले, अल्लाह के आख़िरी वली हज़रत इमाम महदी (अ. स.) से परिचित हो गये हैं तो हम चाहते हैं कि उनक...
 
 47603
  •  2009-10-26
इन्तेज़ार जब काले बादल सूरज के तेजस्वी चेहरे को छिपा दें, दश्त व जंगल सूरज की चरण स्पर्श से वंचित हो जायें और पेड़ पौधे व फल फूल उस सूरज की मुहब्बत की दूरी से बेजान हो जायें तो उस वक़्त क्या किया जाये ? जब अच्छाईयों का मुजस्समा और खुबसूरतियों का आइन...
 
इस ग़ैबत के ज़मान की सब से बड़ी मुश्किल और परेशानी यह है कि शिया अपने मौला व आक़ा के दर्शन से वंचित हैं। ग़ैबत का ज़माना शुरु होने के बाद से उनके ज़हूर का इन्तेज़ार करने वालों के दिलों को हमेशा यह तमन्ना बेताब करती रही है कि किसी भी तरह से यूसुफे ज़...
 
हज़रत इमाम महदी (अ. स.) की न्याय व समानता पर आधारित हुकूमत के उद्देश्यों से परिचित होने के बाद अब हम उस हुकूमत की योजनाओं और कारनामों के बारे में उल्लेख करते हैं, ताकि ज़हूर के ज़माने में होने वाले कामों को पहचान कर, ज़हूर से पहले के ज़माने के लिए एक...
 
 
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